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#301
idamittham
Keymaster

Deodatta ji ! मन एक द्रव्य है। द्रव्य का स्वभाव होता है तरलता और परिवर्तनशीलता। निरन्तर प्रयास से स्वभाव में स्थिरता आती है। विचार के द्वारा अनावश्यक को पहचानना और अभ्यास के द्वारा अनावश्यक से दूर होना , ये दो विधियाँ हैं। ध्यान रहे इन दोनों का सजगता से लम्बे समय तक प्रयोग से मन स्थिरता को प्राप्त करेगा। शुभमस्तु नित्यम् !

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